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Tuesday, January 11, 2011

क्या कहेंगे अब अल्लाह मुहम्मद का नाम अल्लोपनिषद में न मानने वाले ?



मुसलमान देश के दुश्मन हैं ग़द्दार हैं इनका सफ़ाया ज़रूरी है । मुसलमानों के धर्म में कोई सच्चाई नहीं है । हिन्दू राष्‍ट्र  की स्थापना के लिए इसलाम का उन्मूलन आवशयक है । इस तरह की भ्रामक बातों से फैली नफ़रत की दीवारें ढहाने के लिए अकेला अल्लोपनिषद ही काफ़ी है ।लेकिन नफ़रत की दीवारें खड़ी करने वाले जब अपनी मेहनत बर्बाद होते हुए देखते हैं तो व्यथित और व्याकुल हो उठते हैं ।
आदरणीय वेद व्यथित जी

आपने वैदिक सम्पत्ति पढ़ने की सलाह दी है । आप उसे उपलब्ध करा दीजिये मैं उसे पढ़ लूंगा। लेकिन क्या आप मैक्समूलर व अन्य वेदविदों का साहित्य पढ़कर मान लेंगे कि वेद ईश्‍वरीय वचन नहीं हैं और न ही इनकी रचना लगभग एक अरब सत्तानवे करोड़ साल पहले हुई है । आप सूरज चांद तारों पर भी वैदिक लोगों का होना मानते हो । क्या आप आधुनिक वैज्ञानिकों के कथन को स्वीकार करते हुए दयानन्द जी की मान्यता को ग़लत स्वीकार कर लेंगे ? वैदिक सम्पत्ति के लेखक के गुरू का वेदार्थ ही हमारी समझ से बाहर है । आपके पधारने से हमें अपनी जिज्ञासा “शांत करने का दर्लुभ योग मिला है । सो आप से पूछता हूं -

गुदा से सांप ले जाना

‘ हे मनुष्‍यों  , तुम मांगने से पुष्टि  करने वाले को स्थूल गुदा इंद्रियों के साथ वर्तमान अंधे सांपों को गुदा इंद्रियों के साथ वर्तमान विशेष कुटिल सर्पों को आंतों से , जलों को नाभि के भाग से , अण्डकोश को आंड़ों से , घोड़ों को लिंग और वीर्य से , संतान को पित्त से , भोजनों को पेट के अंगों को गुदा इंद्रिय से और “व्‍यक्तियों से शिखावटों को निरन्तर लेओ । ’{ यजुर्वेद 25 ः 7 , दयानन्द भाष्‍य  पृष्‍ठ  876 }

इस मन्त्र का क्या अर्थ समझ में आता है?

ये कौन सा विज्ञान है जिसपर मनुष्‍य की उन्नति टिकी हुई है । 

ऐसी बातों को देखकर ही पश्चिमी वेदिक स्कॉलर्स ने वेदों को गडरियों के गीत समझ लिया तो क्या ताज्जुब है ? 

हो सकता है इसका कुछ और अच्छा सा अर्थ हो जो दयानन्द जी को न सूझा हो लेकिन वैदिक सम्पत्ति आदि किसी अन्य साहित्य में दिया गया हो । यदि आपकी नज़र में हो तो हमारी जिज्ञासा अवय “शांत करें । और अगर कोई भी इसका सही अर्थ और इस्तेमाल न जानता हो तब भी कोई बात नहीं । इसके बावजूद हम वेदों का आदर करते रहेंगे । करोड़ों साल पुरानी किसी किताब की सारी बातें समझ में आना मुमकिन भी नहीं है। इसकी कुछ बातें तो समझ में आ रही हैं , ये भी कुछ कम नहीं है । 

बहरहाल किसी के न मानने से अल्लोपनिषद सबके लिए असत्य और अमान्य नहीं ठहरता । जो लोग उसमें आस्था रखते हैं उनके लिए तो वह प्रमाण माना ही जाएगा । हिन्दू भाइयों में कोई किसी एक ग्रन्थ को मानता है और कोई किसी दूसरे ग्रन्थ को । आपको वेदों में आस्था है तो आप वेद संबंधी प्रमाण देख लीजिये।

श्री सौरभ आत्रेय जी ने भी पुराणों को लेकर यही आपत्ति की थी । उनसे भी हमने यही विनती की थी । आप समेत आपत्ति करने वाले सभी ब्लॉगर भाइयों के लिए अपने “शिघ्र प्रकाश्‍य  उस लेख का एक अंश शेष है -

वैदिक साहित्य में अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद साहब सल्ल. का वर्णनआपत्ति- इसके साथ-2 मुहम्मद साहब को हिन्दू धर्मग्रन्थों के अनुसार अंतिम अवतार घोशित करने लगे ताकि हिन्दू भी उनके छलावों में आकर उनके असत्य को सत्य मान ले । ये लोग हिन्दू धर्म ग्रन्थों में से कुछ “शब्द और वक्तव्य ऐसे निकालते हैं जैसे ’मकान’ और ’दुकान’ में से कान “शब्द निकाल कर उसकी व्याख्या करने लगे ।निराकरण- हिन्दू धर्म ग्रन्थों में पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद का नाम ही नहीं बल्कि अल्लाह का नाम भी साफ़ साफ़ लिखा हुआ है । ऐसे में “शब्दों को तोड़ मरोड़ कर हिन्दुओं को छलने की हमें क्या ज़रुरत है ?

अल्लो ज्येष्‍ठं  श्रेष्‍ठं  परमं पूर्ण ब्रहमाणं अल्लाम् ।। 2 ।।

अल्लो रसूल महामद रकबरस्य अल्लो अल्लाम् ।। 3 ।।

अर्थात ’’ अल्लाह सबसे बड़ा , सबसे बेहतर , सबसे ज़्यादा पूर्ण और सबसे ज़्यादा पवित्र है । मुहम्मद अल्लाह के श्रेष्‍ठतर रसूल हैं । अल्लाह आदि अन्त और सारे संसार का पालनहार है । (अल्लोपनिषद 2,3)

आपत्ति- क्या इसलाम के जन्म से पहले कोई ऐसा विद्वान नहीं हुआ जो वैदिक पुस्तकों के इस मंतव्य को समझ सका कि अहमद या मोहम्मद नाम का अवतार होगा ?

निराकरण- असल सवाल पहले या बाद का नहीं है बल्कि मंतव्य समझने का है। ऐसे लोग हमेश रहे हैं और आज भी हैं। डा. वेदप्रकाष उपाध्याय, डा. एम.ए. श्रीवास्तव, डा. गजेन्द्र कुमार पण्डा, श्री आचार्य राजेन्द्र प्रसाद मिश्र, श्री दुर्गाशंकर महिमवत सत्यार्थी और गुजरात के महान वेद भाष्‍यकार श्री आचार्य विष्‍ण्‍ु्  देव पण्डित जी ऐसे ही प्रबुद्ध और ईमानदार विद्वान हैं। प्रथम दो विद्वानों द्वारा इस विषय पर लिखित पुस्तकें वदसपदम उपलब्ध हैं। देखें- antimawtar.blospot.com
आपात्ति- हाल तो हमारी किसी भी मान्य प्रमाणिक पुस्तक में अवतारवाद को ही मान्यता ही नहीं है।निराकरण- आप पुराणों को झूठ का पुलिन्दा बताते हैं, फिर जब आपकी मान्य पुस्तकों में पुराण “शमिल ही नहीं हैं तो आपको अवतारवाद का जि़क्र मिलेगा कैसे ? आपकी मान्य धर्मपुस्तकों की सूची बहुसंख्यक परम्परावादी हिन्दुओं से अलग है । आप वेदों के अर्थ भी प्राचीन भाष्‍यों के विपरीत करते हैं। 

आपत्ति- और जिस भविष्‍य पुराण कि ये व्याख्या करते फिरते हैं वो वैसे भी कोई हिन्दुओं की प्रमाणिक पुस्तक नहीं है तो उसमें या अन्य पुराणों का उदाहरण देना ही ग़लत है।

निराकरण - पुराण होने के कारण भविष्‍य पुराण दयानन्द जी को चाहे मान्य न हों परन्तु बहुसंख्यक सनातनी हिन्दू संस्थाएं इसे सदा से प्रकाशित करती आ रही हैं। “शान्ति कुन्ज हरिद्वार के संस्थापक श्रीराम आचार्य जी द्वारा अनूदित भविष्‍य पुराण आज भी सुलभ है। अतः उससे प्रमाण देना ग़लत नहीं कहा जा सकता।

आपत्ति - किन्तु मुझे इतना आभास भी है कि इन पुराणों में भी ऐसा नहीं लिखा।

निराकरण - आभास से काम चलाने की ज़रूरत नहीं है। न तो स्वयं भ्रम के शिकार बनिये और न ही भ्रम की धुंध से दूसरों की बुद्धि ढकने की कोशिष कीजिये। हाथ कंगन को आरसी क्या ? भविष्‍य पुराण खोलकर डा. वेद प्रकाश उपाध्याय जी की पुस्तकों के हवालों का मिलान कर लीजिये। अल्लोपनिषद की तरह उसमें भी सब कुछ स्पष्‍ट है । इतने स्पष्‍ट प्रमाण देखने के बाद आप यह नहीं कह सकते कि हज़रत मुहम्मद साहब स. का नाम वैदिक साहित्य में कहीं भी नहीं पाया जाता । अलबत्ता अपने इनकार पर डटे रहने के लिए अब आपके सामने इन महान ग्रन्थों को ही झुठलाने के अलावा कोई उपाय नहीं बचता । इसके बावजूद भी आप न तो लोगों की आंखों में धूल झोंक सकते हैं और न ही सत्य को झुठला सकते हैं क्योंकि हज़रत मुहम्मद साहब स. का वर्णन तो वेदों में भी है जिनको आप असन्दिग्ध रूप से सत्य मानते हैं । देखें-
‘‘ नराशंस  और अन्तिम ऋषि ‘‘ लेखक :डा. वेद प्रकाष उपाध्यायभारत और स्वयं के बेहतर भविष्‍य के लिए हमें अपने धर्म ग्रन्थों की उन शिक्षाओं को सामने लाना ही होगा जिनसे नफ़रत और दूरियों का ख़ात्मा होता है । भले ही यह बात उन एकाधिकारवादियों को कितनी ही बुरी लगे जो अपना वर्चस्व खोने के डर से लोगों को प्रायः भरमाते रहते हैं ।

डिवाइड एन्ड रूल के दिन अब लदने वाले हैं ‘युनाइट एन्ड रूल‘ के ज़रिये बनेगा अब भारत विश्‍व  गुरू ।
आओ मिलकर चलें कल्याण की ओर

वेद,पुराण,और उपनिषद में पैगम्बर मोहम्मद(स.अ.व्.)

वेद,उपनिषद,और पुराणों में मोहम्मद(स.अ.व्.)
                        
                      
                           कुरआन की एक आयत का अनुवाद है,जिसमें भगवान्(खुदा) कहता है- ‘‘कोई क़ौम ऐसी नहीं गुजरी, जिसमें कोई सचेत करने वाला न आया हो।’’ (35: 24) लगभग हर धर्मग्रन्थ में कुछ इसी के समानार्थी उद्दरण दिए गए हैं,और धर्मशास्त्रों के गहन और सूक्ष्म अवलोकन करने पर,पुष्टित होता है,कि सभी धर्म एक ही मूल से जुड़े हुए हैं, देश,काल,भाषा,जाति,और समाज के प्रभावों से उनमें इतना परिवर्तन आ गया,कि हर धर्म एक दुसरे से जुदा (अलग-अलग) नज़र आता है,….आइये हम हिन्दू(वैदिक) धर्मग्रंथों और इस्लाम में समानताओं पर नज़र डालते हैं.
                                               

                                     संसार का हर धर्म,एक अंतिम पैगम्बर) देवता के धरती पर जन्म लेने कि भविष्यवाणी करता है,……………हिन्दू धर्मग्रंथों में “कल्कि” अवतार और “नरासंश” के जन्म लेने कि भविष्यवानियाँ कि गयी हैं…..तो बौध धर्मग्रंथों में “मैत्रेई बुद्ध” के पदार्पण होने का उल्लेख किया गया है,….इसाई धर्म और यहूदी धर्म कि पुस्तकों में भी लगभग ऐसे ही भविष्यवानियाँ कि गयी हैं.
                                               
                                               वेदों के अनुसार उष्ट्रारोही का नाम ‘नराशंस’ होगा। ‘नराशंस’ का अरबी अनुवाद ‘मुहम्मद’ होता है।
 नराशंस: यो नरै: प्रशस्यते। (सायण भाष्य, ऋग्वेद संहिता, 5/5/2)।
मूल मंत्र इस प्रकार है –
‘‘नराशंस: सुषूदतीमं यज्ञामदाभ्यः ।
कविर्हि ऋग्वेद में भी कहा गया है कि
अहमिद्धि पितुष्परि मेधामृतस्य जग्रभ। अहं सूर्य इवाजनि।।’
 सामवेद में भी है:
‘आहमिधि पितुः परिमेधामृतस्य जग्रभ। अहं सूर्य इवाजनि।। (सामवेद प्र. 2 द. 6 मं. 8)
                                                अर्थात, अहमद (मुहम्मद) ने अपने रब से हिकमत से भरी जीवन व्यवस्था को हासिल किया। मैं सूरज की तरह रौशन हो रहा हूं।’ जबकि इसमें तो मोहम्मद के दुसरे नाम “अहमद” को भी स्पष्ट किया गया है.
उष्ट्रा यस्य प्रवाहिणो वधूमन्तों द्विर्दश। वर्ष्‍मा रथस्य नि जिहीडते दिव ईषमाण उपस्पृशः। -अथर्ववेद कुन्ताप सूक्त 20/127/२
                                              अर्थात, जिसकी सवारी में दो खूबसूरत ऊंटनियां हैं। या तो अपनी बारह पत्नियों समेत ऊंटों पर सवारी करता है उकसी मान-प्रतिष्ठा की ऊंचाई अपनी तेज़ रफ्तार से आसमान को छूकर नीचे उतरती है। पैगम्बर मोहम्मद ऊंट कि सबारीही किया करते है,और अपने लिए ख़ास तौर पर दो ऊंटनियाँ रखते थे,और आश्चर्य जनक रूप से उनकी भी बारह पत्नियां थीं.
                       आप (सल्ल.) की पत्नियों के नाम क्रम से इस प्रकार हैं – 1. हज़रत ख़दीजा (रज़ि), 2. हज़रत सौदा (रजि.), 3. हज़रत आइशा (रजि.), 4. हज़रत हफ़्सा (रजि.), 5. हज़रत उम्मे सलमा (सल्ल.), 6. हज़रत उम्मे हबीब (रजि.), 7. हज़रत ज़ैनब बिन्त जहश (रजि.), 8. हज़रत ज़ैनब बिन्त खुज़ैमा (रजि.), 9. हज़रत जुवैरिया (रजि.), 10. सफ़ीया (रजि.), 11. हज़रत रैहाना (रजि.), और 12. हज़रत मैमूना (रजि.)
                                        भविष्य पुराण के अनुसार, शालिवाहन (सात वाहन) वंशी राजा भोज दिग्विजय करता हुआ समुद्र पार (अरब) पहुंचेगा। इसी दौरान (उच्च कोटि के) आचार्य शिष्यों से घिरे हुए महामद (मुहम्मद सल्ल.) नाम से विख्यात आचार्य को देखेगा। (प्रतिसर्ग पर्व 3, अध्याय 3, खंड 3, कलियुगीतिहास समुच्चय)
भविष्य पुराण में कहा गया है-
लिंड्गच्छेदी शिखाहीनः श्मश्रुधारी स दूषकः। उच्चालापी सर्वभक्षी भविष्यति जनो मम। 25। विना कौलं च पश्वस्तेषां भक्ष्या मता मम। मुसलेनैव संस्कारः कुशैरिव भविष्यति। 26।। तस्मान्मुसलवन्तो हि जातयो धर्मदूषकाः। इति पैशाचधर्मश्च भविष्यति मया कृतः । 27 ।। (भ.पु. पर्व 3, खण्ड 3, अध्याय 1, श्लोक 25, 26, 27)
                                       इन श्लोकों का भावार्थ इस प्रकार है-‘हमार लोगों का ख़तना होगा, वे शिखाहीन होंगे, वे दाढ़ी रखेंगे, ऊंचे स्वर में आलाप करेंगे यानी अज़ान देंगे। शाकाहारी मांसाहारी (दोनों) होंगे, किन्तु उनके लिए बिना कौल यान मंत्र से पवित्र किए बिना कोई पशु भक्ष्य (खाने) योग्य नहीं होगा (वे हलाल मांस खाएंगे)। इसक प्रकार हमारे मत के अनुसार हमारे अनुयायियों का मुस्लिम संस्कार होगा। उन्हीं से मुसलवन्त यानी निष्ठावानों का धर्म फैलेगा और ऐसा मेरे कहने से पैशाच धर्म का अंत होगा।’ अर्थात उनके सर पर “बालों की छोटी/चुटिया” नहीं होगी,अर्थात वे सनातन हिन्दू धर्म की मान्यताओं से अलग…….शिखाहीन होंगे,
पुराण में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि ‘एक दूसरे देश में एक आचार्य अपने मित्रों के साथ आएंगे। उनका नाम महामद होगा। वे रेगिस्तानी क्षेत्र में आएंगे।
(एतस्मिन्नन्तिरे म्लेच्छ आचाय्र्येण समन्वितः।। महामद इति ख्यातः शिष्यशाखा समन्वितः।।)’
इस अध्याय का श्लोक 6,7,8 भी मुहम्मद साहब के विषय में है।
 नागेंद्र नाथ बसु द्वारा संपादित विश्वकोष के द्वितीय खण्ड में उपनिषदों के वे श्लोक दिए गए हैं
अस्माल्लां इल्ले मित्रावरुणा दिव्यानि धत्त इल्लल्ले वरुणो राजा पुनर्दुदः।
हयामित्रो इल्लां इल्लां वरुणो मित्रास्तेजस्कामः ।। 1
 ।। होतारमिन्द्रो होतारमिन्द्र महासुरिन्द्राः।
अल्लो ज्येष्ठं श्रेष्ठं परमं पूर्ण बह्माणं अल्लाम् ।।
2 ।। अल्लो रसूल महामद रकबरस्य अल्लो अल्लाम् ।।
3 ।। (अल्लोपनिषद 1, 2, 3)
                                              अर्थात, ‘‘इस देवता का नाम अल्लाह है। वह एक है। मित्रा वरुण आदि उसकी विशेषताएँ हैं। वास्तव में अल्लाह वरुण है जो तमाम सृष्टि का बादशाह है। मित्रो! उस अल्लाह को अपना पूज्य समझो। यह वरुण है और एक दोस्त की तरह वह तमाम लोगों के काम संवारता है। वह इंद्र है, श्रेष्ठ इंद्र। अल्लाह सबसे बड़ा, सबसे बेहतर, सबसे ज़्यादा पूर्ण और सबसे ज़्यादा पवित्रा है। मुहम्मद (सल्ल.) अल्लाह के श्रेष्ठतर रसूल हैं। अल्लाह आदि, अंत और सारे संसार का पालनहार है। तमाम अच्छे काम अल्लाह के लिए ही हैं। वास्तव में अल्लाह ही ने सूरज, चांद और सितारे पैदा किए हैं।’’
उपनिषद में आगे कहा गया है-
 फट ।। 9 ।। असुरसंहारिणी हृं द्दीं अल्लो रसूल महमदरकबरस्य अल्लो अल्लाम् इल्लल्लेति इल्लल्ला ।। 10 ।। इति अल्लोपनिषद आदल्ला बूक मेककम्। अल्लबूक निखादकम् ।। 4 ।। अलो यज्ञेन हुत हुत्वा अल्ला सूय्र्य चन्द्र सर्वनक्षत्राः ।। 5 ।। अल्लो ऋषीणां सर्व दिव्यां इन्द्राय पूर्व माया परमन्तरिक्षा ।। 6 ।। अल्लः पृथिव्या अन्तरिक्ष्ज्ञं विश्वरूपम् ।। 7 ।। इल्लांकबर इल्लांकबर इल्लां इल्लल्लेति इल्लल्लाः ।। 8 ।। ओम् अल्ला इल्लल्ला अनादि स्वरूपाय अथर्वण श्यामा हुद्दी जनान पशून सिद्धांत जलवरान् अदृष्टं कुरु कुरु
                                       अर्थात् ‘‘अल्लाह ने सब ऋषि भेजे और चंद्रमा, सूर्य एवं तारों को पैदा किया। उसी ने सारे ऋषि भेजे और आकाश को पैदा किया। अल्लाह ने ब्रह्माण्ड (ज़मीन और आकाश) को बनाया। अल्लाह श्रेष्ठ है, उसके सिवा कोई पूज्य नहीं। वह सारे विश्व का पालनहार है। वह तमाम बुराइयों और मुसीबतों को दूर करने वाला है। मुहम्मद अल्लाह के रसूल (संदेष्टा) हैं, जो इस संसार का पालनहार है। अतः घोषणा करो कि अल्लाह एक है और उसके सिवा कोई पूज्य नहीं।’’
कल्कि पुराण में अंतिम अवतार के जन्म का भी उल्लेख किया गया है। इस पुराण के द्वितीय अध्याय के श्लोक 15 में वर्णित है-
‘‘द्वादश्यां शुक्ल पक्षस्य, माधवे मासि माधवम्। जातो ददृशतुः पुत्रं पितरौ ह्रष्टमानसौ।। अर्थात ‘‘जिसके जन्म लेने से दुखी मानवता का कल्याण होगा, उसका जन्म मधुमास के शुक्ल पक्ष और रबी फसल में चंद्रमा की 12वीं तिथि को होगा।’’
 एक अन्य श्लोक में है कि कल्कि शम्भल में विष्णुयश नामक पुरोहित के यहां जन्म लेंगे।
 (शम्भलग्राममुख्यस्य ब्राह्मणस्य महात्मनः। भवने विष्णुयशसः कल्किः प्रादुर्भविष्यति।।) (भागवत पुराण, द्वादश स्कंध, 2 अध्याय, 18वाँ श्लोक)
मुहम्मद साहब (सल्ल.) का जन्म 12 रबीउल अव्वल को हुआ। रबीउल अव्वल का अर्थ होता हैः मधुमास का हर्षोल्लास का महीना। आप मक्का में पैदा हुए। विष्णुयशसः कल्कि के पिता का नाम है, जबकि मुहम्मद साहब के पिता का नाम अब्दुल्लाह था। जो अर्थ विष्णुयश का होता है वही अब्दुल्लाह का। विष्णु यानी अल्लाह और यश यानी बन्दा = अर्थात अल्लाह का बन्दा = अब्दुल्लाह। इसी तरह कल्कि की माता का नाम सुमति (सोमवती) आया है जिसका अर्थ है – शांति एवं मननशील स्वभाववाली। आप (सल्ल.) की माता का नाम भी आमिना था जिसका अर्थ है शांतिवाली।
                                      हिटलर की आत्मकथा “मेन -कैम्फ” (मेरी जीवन गाथा) से साभार उद्धृत ‘‘इस धरती पर एक ही व्यक्ति सिद्धांतशास्त्री भी हो, संयोजक भी हो और नेता भी, यह दुर्लभ है। किन्तु महानता इसी में निहित है।’’पैग़म्बरे-इस्लाम मुहम्मद के व्यक्तित्व में संसार ने इस दुर्लभतम उपलब्धि को सजीव एवं साकार देखा है.
                            बास्वर्थ स्मिथ के विचार ‘‘ वे जैसे सांसारिक राजसत्ता के प्रमुख थे, वैसे ही दीनी पेशवा भी थे। मानो पोप और क़ेसर दोनों का व्यक्तित्व उन अकेले में एकीभूत हो गया था। वे सीज़र (बादशाह) भी थे पोप (धर्मगुरु) भी। वे पोप थे किन्तु पोप के आडम्बर से मुक्त। और वे ऐसे क़ेसर थे, जिनके पास राजसी ठाट-बाट, आगे-पीछे अंगरक्षक और राजमहल न थे, राजस्व-प्राप्ति की विशिष्ट व्यवस्था। यदि कोई व्यक्ति यह कहने का अधिकारी है कि उसने दैवी 


Tuesday, January 04, 2011

"कल्कि अवतार को पहचाने?"

हम सब एक हैं, क्या ये सही नहीं है....दिल से पूछिये और पता करिए वो सब रिश्ते, वो सब डोर जो आपस में जोड़ने के काम आती हों.......उन रिश्तों और डोर में सबसे पहले हैं वेद, पुराण, उपनिषद, बाइबल, कुरान और हदीस आदि पढ़े और जाने वास्तविकता ! इसी प्रयास में एक प्रयास- कल्कि अवतार को पहचाने !!!




कल्कि अवतार कौन है? क्या कल्कि अवतार अभी आएगा या आ चुका है? वेद क्या कहते हैं इस बारे में, कुरान क्या कहता है?
ये सब जानना है तो पढ़े ये लेख- "कल्कि अवतार को पहचाने?" (इसके मुताल्लिक़ ज्यादा पढने के लिए आप http://antimawtar.blogspot.com पर जा कर पढ़ सकते हैं.)


Muhammad