अब यह खुफिया एजेंसियां ऐसे कानून बनवाने के चक्कर में हैं कि जिसको भी पकड़ कर बंद कर दें, उसको अदालतें न एजेंसियों के बयानों के आधार पर लम्बी-लम्बी सजाएं कर दीं। भारतीय विधि का मूल सिद्धांत है कि पुलिस के समक्ष दिए गए किसी भी बयान कि कोई उपयोगिता न्यायिक विचरण में नहीं है। क्योंकि पुलिस संगठन की विश्वसनीयता न कभी रही है न हो सकती है। हमारे आपके आम जीवन में पुलिस आये दिन जो करती है अगर उस पुलिस को यह अधिकार मिल जाए कि उसके समक्ष दिए गए बयान को न्यायालय मानने लगे तो इनके द्वारा गिरफ्तार किये गए प्रत्येक व्यक्ति की आत्म स्वीकृतियों के आधार पर हर निर्दोष को भी सजा करा देंगे। कई बार देखने में आया है कि लाश किसी की और किसी के नाम पर लोगों को आजीवन कारावास की सजा हो गयी और जिस व्यक्ति की हत्या के आरोप में लोगों को आजीवन कारावास हुआ वह मृतक व्यक्ति बाद में जिन्दा निकला।
"Allah will not be merciful to those who are not merciful to mankind" (Sahih Bukhari-7376)
Friday, September 16, 2011
भारत का इंटिलिजेंस ब्यूरो या दहशत फ़ैलाने का नया यंत्र है
अब यह खुफिया एजेंसियां ऐसे कानून बनवाने के चक्कर में हैं कि जिसको भी पकड़ कर बंद कर दें, उसको अदालतें न एजेंसियों के बयानों के आधार पर लम्बी-लम्बी सजाएं कर दीं। भारतीय विधि का मूल सिद्धांत है कि पुलिस के समक्ष दिए गए किसी भी बयान कि कोई उपयोगिता न्यायिक विचरण में नहीं है। क्योंकि पुलिस संगठन की विश्वसनीयता न कभी रही है न हो सकती है। हमारे आपके आम जीवन में पुलिस आये दिन जो करती है अगर उस पुलिस को यह अधिकार मिल जाए कि उसके समक्ष दिए गए बयान को न्यायालय मानने लगे तो इनके द्वारा गिरफ्तार किये गए प्रत्येक व्यक्ति की आत्म स्वीकृतियों के आधार पर हर निर्दोष को भी सजा करा देंगे। कई बार देखने में आया है कि लाश किसी की और किसी के नाम पर लोगों को आजीवन कारावास की सजा हो गयी और जिस व्यक्ति की हत्या के आरोप में लोगों को आजीवन कारावास हुआ वह मृतक व्यक्ति बाद में जिन्दा निकला।
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very well researched and thought provoking.
ReplyDeleteसच कहा है।
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